परमवीर चक्र मैजर शैतानसिह भाटी

18 नवंबर का दिन अहीरवालों के लिए विश्व के
सैन्य इतिहास की अनूठी मिसाल के तौर पर याद
किया जाता है। इस दिन यहां के राजनीतिक,
सामाजिक संगठन से लेकर आमजन उन
शहीदों को नमन करते हैं जिन्होंने
चीनी सेना को करारी मात देते हुए
रेजांगला पोस्ट की हिफाजत की थी। इस लड़ाई
में 114 जवानों ने अपना बलिदान दिया।
इन शहीदों की शहादत को नमन करने के लिए
रेजांगला शौर्य समिति और विजय दिवस एवं
रेजागंला शहीदी समारोह समिति पिछले तीस
सालों से इस दिन कार्यक्रम आयोजित कर
शहीदों की वीरांगनाओं और उनके
परिजनों को सम्मानित कर इतिहास के इस
गौरवशाली पन्ने को पलटती रही है। समुद्री तट
से 18 हजार फीट की दुर्गम बर्फीली चोटी पर
स्थित रेजांगला पोस्ट पर मेजर शैतान सिंह
भाटी परमवीर चक्र की कमान में 13 कुमाऊं
की चार्ली कंपनी के अहीर रण बांकुरों ने
जो पराक्रम व बलिदान दिया था, उसकी याद
ताजा होती ही आज भी चीनी सेना के रोंगटे
खड़े हो जाते हैं। 18 नवंबर 1962 की पोह फटते
ही शुरू हुए इस महासमर में 124 जवानों की इस
टुकड़ी ने 1300 से भी अधिक चीनियों को ढेर कर
दिया था। आखिरी जवान और
आखिरी गोली तक चली इस लड़ाई में हमारे
रणबांकुरों ने गोला बारूद्ध खत्म होने पर दुश्मन के
जवानों को पहाड़ी चट्टानों पर पटक पटक कर
मौत के घाट उतारा। कंपनी कंमाडर मेजर शैतान
सिंह सहित कंपनी के 114 जवान मातृ
भूमि की रक्षा करते हुए रणखेत हुए जो जवान
जिंदा रह गए उनके शरीर पर अनेकों घाव थे। अपने
जीते जी दुश्मन को एक इंच जमीन पर कदम न रखने
देने वाले इन अमर शहीदों में 62 हरियाणा की वीर
भूमि के लाल थे, 25 राजपूताना राजस्थान के
शूरमा और 24 देश की नब्ज कहे जाने वाले
उत्तरप्रदेश प्रांत से। एक रणबांकुरा बिहार से, एक
रणबांकुरा मध्यप्रदेश से व एक सफाई
कर्मचारी पंजाब से था। चीन के पीकिंग
रेडियो स्टेशन से भी हमारे इन रणबांकुरे
जवानों की मार का उस वक्त जिक्र हुआ
तथा सम्मान के रूप में हमारे महाबली योद्धाओं के
शवों के पास चीनी सैनिकों ने मोर्चों पर
भी राइफल उल्टी गाड़कर उनकी टोपी रखी हुई
थी। दुनिया के इतिहास में किसी भी एक मोर्चे
पर इतनी बहादुरी से लड़ते हुए दुश्मन
की भारी तबाही कर पूरी कंपनी का शहीद
हो जाना, दूसरी कोई मिसाल नहीं है।
सी कंपनी का नाम
रेजांगला रखा गया तथा बटालियन
को रेजांगला युद्ध सम्मान से विभूषित
किया गया। कंपनी कमांडर मेजर शैतान सिंह
भाटी राजपूत, नर्सिंग सहायक धर्मपाल
दहिया जाट, रामनाई, श्योराम कुक
बावरिया तथा दो सफाई कर्मचारियों रामफल
और बहार के अलावा कंपनी के बाकी सभी शहीद
अहीर जवान थे। अहीर जाति के इस बेमिश्साल
पराक्रम को देखते बाद में कुमाऊं रेजीमेंट की एक
और बटालियन 11 कुमाऊं विशुद्ध रूप से अहीर
जवानों के लिए खड़ी की गई।रेजांगला शौर्य
दिवस पर विशेष
कंपनी कमांडर मेजर शैतान सिंह भाटी राजपूत,
नर्सिंग सहायक धर्मपाल दहिया जाट, रामनाई,
श्योराम कुक बावरिया तथा दो सफाई
कर्मचारियों रामफल और बहार के
अलावा कंपनी के बाकी सभी शहीद अहीर
जाति के जवान थे।
इन्हें किया गया वीरता पुरस्कार से सम्मानित
कंपनी कमांडर मेजर शैतान सिंह
भाटी को मरणोपरांत सर्वोच्च वीरता पदक
परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
सूरजाराम, हरिराम, नायक गुलाब सिंह, हुकम चंद,
सिंहराम, नर्सिंग अर्दली, धर्मपाल
दहिया को मरणोपरांत तथा कप्तान राम कुमार
और कप्तान रामचंद्र को घायल उपरांत वीर चक्र,
सीएचएम हरफूल सिंह मरणोपरांत, कप्तान फूल
सिह, सुबेदार जयनारायण, और कप्तान निहाल
सिंह समेत 8 जवानों को सेना मेडल
तथा बिग्रेडियर आरवी जटार को पेंशन इन
डिस्पेच ओर 13 कुमाऊं के सीओ कर्नल एचएस
धींगरा को अति विशिष्ट सेवा पदक प्रदान
किया गया।

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