क्षैत्ररक्षण


के लिए.
क्षेत्ररक्षण के पक्ष के सभी ग्यारह
खिलाड़ी मैदान में एक साथ रहते हैं| उनमें से एक
विकेट कीपर ( wicket-keeper ) उर्फ "कीपर"
होता है जो स्ट्राइकर बल्लेबाज के
द्वारा बचाए जाने वाले विकेट के पीछे
खड़ा रहता है| विकेट कीपिंग सामान्यत: एक
विशेषज्ञ ही कर सकता है, उसका मुख्य कम उन
गेंदों को पकड़ना होता है जो बल्लेबाज हिट
नहीं करता है| जिससे की बल्लेबाज बाई के रन
ना ले सके| वह विशेष दस्ताने पहनता हैं,(क्षेत्र
रक्षकों में केवल उसी को ऐसा करने
की अनुमति होती है) साथ ही अपने नीचले
टांगों को कवर करने के लिए पैड भी पहनता है|
चूँकि वह सीधे स्ट्राइकर के पीछे खड़ा रहता है,
अत: उसके पास इस बात की बहुत अधिक
संभावना होती है कि वो बल्लेबाज के बल्ले के
किनारे से छू कर निकलती हुई बॉल को कैच
करके बल्लेबाज को आउट कर सके| केवल वही एक
ऐसा खिलाड़ी है जो बल्लेबाज को स्टम्पड
( stumped )आउट कर सकता है|
वर्तमान गेंदबाज के अलावा शेष ९ क्षेत्र रक्षक
कप्तान के द्वारा मैदान में चुने हुए स्थानों
( chosen positions ) पर तैनात रहते हैं|
ये स्थान तय नहीं होते हैं लेकिन ये विशेष और
कभी कभी अच्छे नामों से जाने जाते हैं जैसे
"स्लिप", "थर्ड मेन", "सिली मिड ऑन" और
"लाँग लेग"| हमेशा कुछ असुरक्षित क्षेत्र रहते हैं|
कप्तान क्षेत्ररक्षण पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण
सदस्य होता है क्योंकि वह
सभी रणनीतियां निर्धारित करता है, जैसे
किसे गेंदबाजी करनी चाहिए (और कैसे); और वह
"क्षेत्र की सेटिंग" के लिए भी जिम्मेदार
होता है|
क्रिकेट के सभी रूपों में, यदि एक मैच के दौरान
एक क्षेत्ररक्षक घायल या बीमार हो जाता है
तो उसके स्थान पर किसी और को
प्रतिस्थापित ( substitute)
किया जा सकता है| प्रतिस्थापित
खिलाड़ी गेंदबाज़ी, कप्तानी या विकेट
कीपिंग नहीं कर सकता ह| यदि घायल
खिलाड़ी ठीक होकर वापस मैदान में आ जाए
तो अतिरिक्त खिलाड़ी को मैदान
छोड़ना होता है|

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